मेरे स्नेही जन

Saturday, April 13, 2013

बादल



भीगा वर्षा में जब राजू
आकर माँ से बोला
माँ ! एक बात बतलाओ
क्या है राज मुझे समझाओ
उमड़ घुमड़ कर बादल आते
झम-झम पानी वे बरसाते
कहाँ से आते बादल, माँ !
कहाँ जा छिप जाते ?
वर्षा से आँगन भर जाता
इतना पानी कहाँ से आता
क्या है राज मुझे समझाओ
क्या है बात मुझे बतलाओ
माँ ने बेटे को बतलाया
राज बादल का उसे समझाया
सूरज जब गरमी फैलाता
नदी ,सागर का पानी
तब भाप बन उड़ जाते
और नभ पर जा छा जाते
असंख्य जल बूँद लिए वे
इधर उधर मड़राते
यही तो बादल कहलाते
उमड़ घुमड़ कर जब वो चलते
जा पर्वत से टकराते
तब बनकर वर्षा वे
वापस धरती पर आजाते
इसी तरह धरती का पानी
वापस धरती पर आजाता
रिम-झिम गीत सुनाकर
जग में खुशहाली भर जाता
*******************

महेश्वरी कनेरी

13 comments:

  1. बहुत ही सुंदर बाल कविता

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  2. वाह बेहतरीन

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  3. शुभप्रभात दीदी
    सरल-सहज भाषा में विज्ञान समझा दीं
    सादर !!

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  4. बहुत सुंदर रचना .... सहजता से समझा दिया वाष्पीकरण को

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  5. बहुत ही सुन्दर बालकविता,आभार.

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  6. bahut hi sundar aur sahaj hai bachho ki ye kavita , bahut pasand aayi

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  7. आज 15/04/2013 को आपकी यह पोस्ट http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की गयी हैं. आपकी प्रतिक्रिया का स्वागत है .
    धन्यवाद!

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  8. बहुत सुंदर बाल कविता...

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  9. बहुत ही सुन्दर रचना! मेरी बधाई स्वीकारें।
    कृपया यहां पधार कर मुझे अनुग्रहीत करें-
    http://voice-brijesh.blogspot.com

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  10. भावमय करते शब्‍दों का संगम....

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